Sedition Law in India

Introduction to 376 ipc in hindi

376 IPC in hindi -: धारा 376 बलात्संग के लिए दंड का प्रावधान करती है। दांडिक विधि (संशोधन) अधिनियम, 2018 के अनुसार धारा 376(1) सजा सात वर्ष के स्थान पर दस वर्ष कर दिया गया है।

धारा IPC 376  को तीन भागों में बांटा जा सकता है

  1. बलात्कार की सजा: 10 साल के लिए कठोर कारावास से लेकर आजीवन कारावास + जुर्माना
  2. पुलिस अधिकारी आदि जैसे अधिकार में होने के कारण किसी महिला से बलात्कार करने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए बलात्कार की सजा: प्राकृतिक जीवन के लिए कठोर कारावास + जुर्माना के लिए 10 साल के लिए कठोर कारावास
  3. सोलह साल या उससे कम उम्र की नाबालिग से बलात्कार के लिए बलात्कार की सजा: 20 साल के लिए कठोर कारावास से लेकर प्राकृतिक-जीवन के लिए कारावास + जुर्माना

376 IPC in hindi : आईपीसी, 1860 (भारतीय दंड संहिता) की धारा 376 का विवरण – बलात्संग के लिए दण्ड (Punishment for Rape) –

(1) जो कोई, उपधारा (2) में उपबंधित मामलों के सिवाय, बलात्संग करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कठोर कारावास से, “जिसकी अवधि दस वर्ष से कम की नहीं होगी किन्तु जो आजीवन कारावास तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा”। [क्रिमिनल लॉ (संशोधन) अधिनियम, 2018, दिनांक – 11 अगस्त 2018 द्वारा प्रतिस्थापित] 

(2) जो कोई – 

(क) पुलिस अधिकारी होते हुए –

(i) उस पुलिस थाने की, जिसमें ऐसा पुलिस अधिकारी नियुक्त है, सीमाओं के भीतर; या

(ii) किसी भी थाने के परिसर में; या 

(ii) ऐसे पुलिस अधिकारी की अभिरक्षा में या ऐसे पुलिस अधिकारी के अधीनस्थ किसी पुलिस अधिकारी की अभिरक्षा में, किसी स्त्री से बलात्संग करेगा; या

(ख) लोक सेवक होते हुए, ऐसे लोक सेवक की अभिरक्षा में या ऐसे लोक सेवक के अधीनस्थ किसी लोक सेवक की अभिरक्षा में की किसी स्त्री से बलात्संग करेगा; या  

(ग) केन्द्रीय या किसी राज्य सरकार द्वारा किसी क्षेत्र में अभिनियोजित सशस्त्र बलों का कोई सदस्य होते हुए, उस क्षेत्र में बलात्संग करेगा; या

(घ) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा या उसके अधीन स्थापित किसी जेल, प्रतिप्रेषण गृह या अभिरक्षा के अन्य स्थान के या स्त्रियों या बालकों की किसी संस्था के प्रबंधतंत्र या कर्मचारिवृन्द में होते हुए, ऐसी जेल, प्रतिप्रेषण गृह, स्थान या संस्था के किसी निवासी से बलात्संग करेगा; या

(ङ) किसी अस्पताल के प्रबंधतंत्र या कर्मचारिवृन्द में होते हुए, उस अस्पताल में किसी स्त्री से  बलात्संग करेगा; या  

च) स्त्री का नातेदार, संरक्षक या अध्यापक अथवा उसके प्रति न्यास या प्राधिकारी की हैसियत में का कोई व्यक्ति होते हुए, उस स्त्री से बलात्संग करेगा; या

(छ) सांप्रदायिक या पंथीय हिंसा के दौरान बलात्संग करेगा; या

(ज) किसी स्त्री से यह जानते हुए कि वह गर्भवती है बलात्संग करेगा; या

(झ)  “विलोपित” [क्रिमिनल लॉ (संशोधन) अधिनियम, 2018, दिनांक – 11 अगस्त 2018 द्वारा]

(ञ) उस स्त्री से, जो सम्मति देने में असमर्थ है, बलात्संग करेगा; या

(ट) किसी स्त्री पर नियंत्रण या प्रभाव रखने की स्थिति में होते हुए, उस स्त्री से बलात्संग करेगा; या

(ठ) मानसिक या शारीरिक नि:शक्तता से ग्रसित किसी स्त्री से बलात्संग करेगा; या 

(ड) बलात्संग करते समय किसी स्त्री को गंभीर शारीरिक अपहानि कारित करेगा या विकलांग बनाएगा या विद्रूपित करेगा या उसके जीवन को संकटापन्न करेगा; या

(ढ) उस स्त्री से बारबार बलात्संग करेगा,

वह कठोर कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो आजीवन कारावास तक की हो सकेगी, जिससे उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास अभिप्रेत होगा, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा। 

(3) जो कोई सोलह वर्ष की कम आयु की किसी स्त्री से बलात्संग करेगा, वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि बीस वर्ष से कम की नहीं होगी किन्तु जो आजीवन कारावास, जिसका अभिप्राय उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास होगा, तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा :

परंतु ऐसा जुर्माना पीड़ित की चिकित्सा व्ययों और पुनर्वास की पूर्ति करने के लिए नयायोचित और युक्‍क्तियुकत होगा :

परंतु यह और कि इस उपधारा के अधीन अधिरोपित किसी भी जुर्माने का संदाय पीड़ित को किया जाएगा ।” [क्रिमिनल लॉ (संशोधन) अधिनियम, 2018, दिनांक – 11 अगस्त 2018 द्वारा प्रतिस्थापित] 

स्पष्टीकरण – इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए,

(क) “सशस्त्र बल” से नौसैनिक, सैनिक और वायु सैनिक अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन गठित सशस्त्र बलों का, जिसमें ऐसे अर्धसैनिक बल और कोई सहायक बल भी हैं, जो केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के नियंत्रणाधीन हैं, कोई सदस्य भी है;

(ख) “अस्पताल” से अस्पताल का अहाता अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत किसी ऐसी संस्था का अहाता भी है, जो स्वास्थ्य लाभ कर रहे व्यक्तियों को या चिकित्सीय देखरेख या पुनर्वास की अपेक्षा रखने वाले व्यक्तियों के प्रवेश और उपचार करने के लिए है;

(ग) “पुलिस अधिकारी” का वही अर्थ होगा जो पुलिस अधिनियम, 1861 (1861 का 5) के अधीन पुलिस पद में उसका है;

(घ) “स्त्रियों या बालकों की संस्था” से स्त्रियों और बालकों को ग्रहण करने और उनकी देखभाल करने के लिए स्थापित और अनुरक्षित कोई संस्था अभिप्रेत है चाहे उसका नाम अनाथालय हो या उपेक्षित स्त्रियों या बालकों के लिए गृह हो या विधवाओं के लिए गृह या किसी अन्य नाम से ज्ञात कोई संस्था हो ।

बलात्कार से जुड़े कुछ मामले

पृथ्वी चन्द्र बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य. ए.आई.आर. 1989 सु.को. 702(Prithi Chand vs State Of Himachal Pradesh on 17 January, 1989) के प्रकरण में कहा गया कि बलात्कार के लिए यह आवश्यक नहीं है कि प्रत्येक मामले में योनि में प्रवेशन के कारण छिद्र विकीर्ण हुआ हो या वीर्य स्राव हुआ हो।

बोधिसत गौतम बनाम सुत्रा चक्रवर्ती (1996) 1 सु.को. 490 के प्रकरण कहा गया कि बतात्संग केवल स्त्री के शरीर के विरुद्ध अपराध मात्र न होकर सम्पूर्ण समाज के प्रति अपराध है। यह एक अत्यन्त घृणास्पद कुकृत्य है। यह एक ऐसा अपराध जो महिलाओं के मूल मानवीय अधिकारों के विरुद्ध होने के साथ-साथ संविधान के अनुच्छेद 21 के अन्तर्गत उन्हें प्राप्त जीवन के अधिकार का घोर उल्लंघन है।

बलात्संग के अपराध को घटित होने के लिए सर्वप्रथम यह आवश्यक है कि यह कृत्य किसी पुरुष द्वारा किसी स्त्री के साथ उसकी सम्मति के बिना कारित हो ।

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